आँखें बंद करो। साँस लो। अपने मन को एक ऐसी पहचान मज़बूत करने दो जिसमें आत्मविश्वास, उपस्थिति और खुद की क़दर झलकती हो। बदलाव भीतर से शुरू होता है, और बाहर तक पहुँचता है।